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ईद मुबारक

ईद की मुबारकबाद हालात के तनाज़ुर में ईदुल फ़ित्र के हसीन मौक़े पर इस यादगार ईद की तरह ये मुख्तलिफ़ ज़ाविये कभी कभी ज़ेहन व दिल को बेक़रार करेंगे । बतौर हाज़री ( 1) सरापा  मज़हरे  इकराम  ईद  का  दिन है ख़ुदा ए पाक का इनआम ईद का  दिन है (2) ईद  के  दिन  हैं  दूर  अपनों से इस बरस ईद कितनी फीकी है  (3) सूने गली मुहल्ले हैं सुनसान हर डगर मैं कैसे कहुं किस से कहूं ईद मुबारक (इरफ़ान नोमानी जाहिदी)

ग़ज़ल

                       ग़ज़ल अपनी  ख़ुश्बू  से  मुअत्तर मुझे कर जाते हो दामने दिल मिरा तुम ख़ुश्यों से भर जाते हो ध्यान में आते हो पल भर के लिए ही लेकिन मेरी ख़ल्वत को भी तुम बज़्म सी कर जाते हो देर  से  आते  हो  जाते  हो  तो   जाते   जाते कोई   इल्ज़ाम   मिरी   ज़ात  पे  धर  जाते हो मुझसे मिलने को  कहूं  फ़ोन  पे तुमसे तो तुम कितना  शर्माते  हो  घबराते  हो डर  जाते हो पहले  बिन  देखे  मुझे रह  भी  नहीं सकते थे अब  तो  तुम  देख के चुपके से गुज़र जाते हो ख़ुद को भी भूल सा जाता हूँ मैं हमदम जब भी तुम  मिरी  फ़िक्र  के  दरया  में  उतर  जाते  हो देख  पाते   नहीं    चेहरे   पे   उदासी ।   मेरी तुम   भी   हंसती  ...

ग़ज़ल

                                      ग़ज़ल मुझको दर पेश वो सफ़र आया जिसमें साया न ही शजर आया इक  परिंदा  ज़मीन  पर  आया हर  परिंदे  के  पर  कतर आया जब गया एक बार अह्दे शबाब लौट कर फिर न उम्र भर आया लौटते  वक्त  जां  का   नज़राना उनकी दहलीज़ पर मैं धर आया उड़  गए  होश  माहो  अंजुम  के जब  मिरा  चांद  बाम  पर  आया बावफ़ा  हो  के  बेवफ़ाई   का हाय   इल्ज़ाम  मेरे  सर  आया अह्दे  माज़ी  के  याद  आते  ही मेरी  आंखों  में  ख़ूं  उतर  आया मुद्दतों   बाद   शुक्र   है   मुझ  पर प्यार  भी  उनको  टूट  कर  आया इसकी  इरफ़ान  हो  गयी  मेअराज इश्क़  जब  जब  भी...